इस ताने बाने को सुलझाने का..
जाने पहचाने..किस्सों का..
और उलझाती बातों का..
एक सीरा..पकड़े कौन..
दूजे सीरे तक जाने का..
साहस कौन करे,
इस ताने बाने को सुलझाने का..
साहस कौन करे,
२३ फरवरी 2010
इस ताने बाने को सुलझाने का..
जाने पहचाने..किस्सों का..
और उलझाती बातों का..
एक सीरा..पकड़े कौन..
दूजे सीरे तक जाने का..
साहस कौन करे,
इस ताने बाने को सुलझाने का..
साहस कौन करे,
२३ फरवरी 2010
तब जानो तुम कौन हो रे!
भागो ना खुद से,
जागो खुद में...
रहो ना चुप,
कह दो सब-कुछ...
पकड़ो हाथ किसी का रे!
तब जानो तुम कौन हो रे!
१४ फरवरी २०१०
ये हंसी बस हंसी सी क्यों है,
ये सूखती हुई नदी क्यों है...
क्यों है ये,एक एहसास नहीं,
क्यों है, सच्चा खवाब नहीं...
क्यों चेतना नहीं इसमें,
क्यों साह्स नहीं इसमें...
क्यों धुंध की गली है ये,
क्यों सुप्त सी कली है ये...
खिलखिलाती, इठलाती, होटों पर नाचती नहीं...
ये हंसी बस हंसी क्यों नहीं...
२५ जनवरी २०१०
मैंने कुछ नहीं जाना है,
सब स्वार्थ है मेरा ये माना है,
बिह्ढ् जीवन के गलियारे,
फिरते हम सब मारे मारे,
जैसे कोई बंजारे...
साँसे घुलती अंतर्मन में,
सपने घुलते,घोर तम में,
और टूटें हम सब में...
मैंने कुछ नहीं जाना है,
सब स्वार्थ है मेरा ये माना है,
१८ जनवरी २०१०