Wednesday, December 16, 2009

अविस्मर्णीय यात्रा

उलटते पलटते बर्के किताब के,
उभर आयी कुछ यादें पुरानी,
गुलाब की कुछ सुखी पंखुडियां...
कुछ टुकड़े पुराने ख़त के...
दीमक की कुछ खाई यादें...
कुछ सिलाब की दाग भरी...
मिटती बनती यादों की तस्वीरे ...
जैसे पानी में बनती लकीरें....

1३-११-२००४


धुंधली यादें ......


धुंधली यादें ......