Friday, December 11, 2009


....सूखे पत्ते जो कह जाते
पतझारों में झड़ कर
प्यासे अंतस में न सुनु कथा
वही तुमसे बिछड़ कर ....
-संजीव
(१४ सितंबर २ooo )

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