Thursday, December 24, 2009

Wednesday, December 16, 2009

अविस्मर्णीय यात्रा

उलटते पलटते बर्के किताब के,
उभर आयी कुछ यादें पुरानी,
गुलाब की कुछ सुखी पंखुडियां...
कुछ टुकड़े पुराने ख़त के...
दीमक की कुछ खाई यादें...
कुछ सिलाब की दाग भरी...
मिटती बनती यादों की तस्वीरे ...
जैसे पानी में बनती लकीरें....

1३-११-२००४


धुंधली यादें ......


धुंधली यादें ......

Friday, December 11, 2009


....सूखे पत्ते जो कह जाते
पतझारों में झड़ कर
प्यासे अंतस में न सुनु कथा
वही तुमसे बिछड़ कर ....
-संजीव
(१४ सितंबर २ooo )

जल परी (अमृत सरोवर)


पिछले सप्ताह अपनी अमृतसर (स्वर्ण मन्दिर) यात्रा के समय यह विडियो मैंने वहां के सरोवर में बनाया था,

Tuesday, December 8, 2009


दो पंखुडियां बिन जिसके फूल अधूरा,

दो पंक्तियाँ जिस बिन गीत न पूरा,